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पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद माझी: अबूझमाड़ के जंगलों से निकला आयुर्वेद का ज्ञान

पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद माझी: अबूझमाड़ के जंगलों से निकला आयुर्वेद का ज्ञान

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के रहने वाले वैद्यराज हेमचंद माझी को 2024 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हेमचंद माझी अपने जड़ी-बूटियों के ज्ञान और आदिवासी समाज के पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए जाने जाते हैं।

वन धन के संरक्षक:

हेमचंद माझी ने पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से अबूझमाड़ के घने जंगलों में पाए जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से लोगों का इलाज कर रहे हैं। उन्हें इन जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों का गहरा ज्ञान है। वे न केवल बीमारी का इलाज करते हैं, बल्कि जंगलों के संरक्षण के लिए भी काम करते हैं। जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करने के लिए वे हमेशा टिकाऊ तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ाई:

हेमचंद माझी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी दवाओं से कैंसर, मधुमेह और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी दवाएं न केवल सस्ती हैं बल्कि कई लोगों के लिए जीवन रक्षक भी साबित हुई हैं। उनकी ख्याति सिर्फ छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से लोग उनके पास इलाज कराने आते हैं।

चुनौतियां और सम्मान:

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अबूझमाड़ के जंगलों में घूमना खतरनाक है। हेमचंद माझी को भी कई बार नक्सलियों द्वारा धमकाया गया है। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और लोगों की सेवा करते रहे। उनके इसी समर्पण को देखते हुए 2024 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आशा की किरण:

हेमचंद माझी आदिवासी चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षक हैं। उनका काम न केवल पारंपरिक ज्ञान को जीवंत रखने में मदद करता है बल्कि यह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए आशा की किरण भी है।

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