हाल ही में, छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की युवा जुडोका रंजीता कोरेटी ने ताइपे, ताइवान में आयोजित एशियाई कैडेट जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके जिले, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
प्रारंभिक जीवन और जुडो की शुरुआत:
रंजीता कोरेटी का जन्म छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में हुआ था। वह छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित कोण्डागांव बालिका गृह की निवासी हैं। उनकी खेल के प्रति गहरी रुचि को देखते हुए, उन्हें इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की मदद से विशेष जूडो प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
रंजीता ने अपने जूडो करियर की शुरुआत 2021 में चंडीगढ़ में आयोजित ओपन नेशनल जूडो टूर्नामेंट से की, जहाँ उन्होंने 40 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियाँ:
रंजीता ने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार कई पदक जीते हैं, जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को दर्शाते हैं:
- 2022: भोपाल में ओपन नेशनल जूडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
- 2024: केरल में आयोजित खेलो इंडिया नेशनल जूडो टूर्नामेंट में 52 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक।
- 2024: महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित खेलो इंडिया क्षेत्रीय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
- 2024: केरल के त्रिशूर में 52 किलोग्राम वर्ग में एक और स्वर्ण पदक।
- पुणे में ओपन नेशनल जूडो चैंपियनशिप: असम, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली के खिलाड़ियों को हराकर स्वर्ण पदक।
- पटना, बिहार में खेलो इंडिया यूथ गेम्स: स्वर्ण पदक।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान:
राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद, रंजीता ने भारत का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय मंच पर करना शुरू किया:
- अप्रैल 2025: जॉर्जिया में कैडेट यूरोपियन कप में 52 किलोग्राम वर्ग में 5वां स्थान।
- 2025: ताशकंद, उज्बेकिस्तान में एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में भी प्रभावशाली प्रदर्शन।
- जुलाई 2025 (12 से 15 जुलाई): ताइपे, ताइवान में एशियाई कैडेट जूडो चैंपियनशिप में 52 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाएँ:
जनवरी 2023 में, रंजीता को भोपाल में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में प्रशिक्षण के लिए चुना गया, जहाँ वह अपनी शिक्षा और जूडो प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं।
रंजीता कोरेटी की सफलता एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। वह देश की युवा खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श बन गई हैं और उनका भविष्य उज्ज्वल है।