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Author: हमर गोठ
छत्तीसगढ़ राज्य न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी इसका एक विशेष महत्व है। विशेषकर प्राचीन शैलचित्रों (Rock Paintings) के मामले में यह क्षेत्र पूरे विश्व में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखता है। इसी ऐतिहासिक कड़ी में रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 10 मील की दूरी पर आग्नेय दिशा में स्थित ‘कबरा पहाड़’ प्रागैतिहासिक कला का एक विश्व प्रसिद्ध और उत्कृष्ट उदाहरण बनकर खड़ा है। आदिमानव की जीवनशैली और कला का उदय पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के गहन अध्ययन के अनुसार, आज से हज़ारों वर्ष…
हमारे रायपुर शहर में एक से बढ़कर एक योग्य और प्रतिभाशाली लोग हुए हैं, जिन्होंने देश और दुनिया में खूब नाम कमाया है। भूतनाथ डे इस शहर के पहले वरिष्ठ (सियान) वकील और नगर पालिका के सभापति थे। यह एक ऐतिहासिक और गौरवमयी तथ्य है कि उन्हीं के घर में स्वामी विवेकानंद (नरेंद्रनाथ दत्त) के माता-पिता और भाई-बहन करीब दो साल तक रहे थे। इसी परिवार के हरिनाथ डे जी का भाषा और साहित्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा नाम था। वे 36 अलग-अलग भाषाओं के जानकार (बहुभाषी) थे। विडंबना देखिए कि महज़ 33 वर्ष की अल्पायु में तेज़ बुखार…
छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला अपने भीतर कई अद्भुत प्राकृतिक संपदाओं को समेटे हुए है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर, मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत में स्थित ‘देवधारा जलप्रपात’ इसी प्राकृतिक सुंदरता का एक अप्रतिम उदाहरण है। यह स्थान न केवल अपनी मनमोहक छटा के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ मिलने वाली असीम शांति और सुकून इसे प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग बनाते हैं। इंद्रावन नदी और जलप्रपात का विहंगम दृश्य देवधारा जलप्रपात का निर्माण ‘इंद्रावन नदी’ के प्रवाह से होता है। जब इस नदी की तेज जलधारा दो…
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बीसवीं शताब्दी के शुरुआती वर्ष छत्तीसगढ़ में राजनीतिक जागृति और उथल-पुथल के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। इस बदलाव की एक बड़ी शुरुआत वर्ष 1903 में हुई, जब प्रशासनिक स्तर पर बरार क्षेत्र को मध्य प्रांत (सेंट्रल प्रोविंस) के साथ जोड़ दिया गया। इस भौगोलिक और प्रशासनिक पुनर्गठन ने यहाँ के समूचे राजनीतिक परिदृश्य पर एक गहरा और दूरगामी प्रभाव डाला। यही वह दौर था जब मध्य प्रांत और छत्तीसगढ़ के स्थानीय नेताओं का सीधा संपर्क प्रखर राष्ट्रवादी नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से होने लगा था। लोकमान्य तिलक के प्रखर विचारों और…
छत्तीसगढ़ के बड़े डोंगर क्षेत्र में स्थित नकटी देवरली एक ऐसी प्राचीन धरोहर है, जो इतिहास, रहस्य और लोकमान्यताओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। यह स्थल अपनी अधूरी संरचना और अनूठी कहानी के कारण क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। स्थानीय हल्बी भाषा में मंदिर को ‘देवरली’ कहा जाता है। इसी कारण इस प्राचीन मंदिर को नकटी देवरली के नाम से जाना जाता है। बड़े डोंगर के दक्षिण दिशा में तालगुड़ा के नीचे स्थित इस स्थल पर एक प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो अतीत की भव्यता का संकेत देते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर…
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध जनजातीय विरासत के लिए विश्व भर में विख्यात है। यहाँ की जनजातियाँ आज भी अपनी आदिम प्रवृत्तियों, प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को सहेजते हुए घने जंगलों के बीच निवास करती हैं। इनके अनूठे रीति-रिवाज, उत्सव, पर्व और लोक संगीत बाहरी दुनिया के लिए हमेशा से ही कौतूहल और आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इन समुदायों के लोग स्वभाव से भोले-भाले, सहज और आत्मीय होते हैं। उनकी सहनशीलता धरती के समान, धैर्य पर्वत जैसा और चरित्र गंगा जल की तरह पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल आदिम संस्कृतियों का एक अक्षय भंडार है।…
नामकरण और प्राचीन संदर्भ कांकेर रियासत का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प इसका नामकरण भी है। प्राचीन शिलालेखों और ताम्रपत्रों में इसे ‘काकराय’ या ‘कांकेर’ कहा गया है। भाषाई दृष्टि से, ‘काक’ शब्द का संबंध कौए से जोड़ा जाता है, जिससे यह धारणा बनी कि यह क्षेत्र कभी घने वनों से आच्छादित था जहाँ पक्षियों का भारी जमावड़ा रहता था। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र ‘कंकन’ प्रदेश का हिस्सा था, जो मध्य भारत के प्राचीन व्यापारिक और सामरिक मार्गों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थी। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाती थी, क्योंकि यह उत्तर…
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति में बांसगीत एक ऐसी परंपरा है, जो न केवल संगीत का माध्यम है, बल्कि समाज, इतिहास और जीवनशैली का सजीव प्रतिबिंब भी प्रस्तुत करती है। यह लोकधारा आदिवासी और ग्रामीण जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करते हुए सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करती है। बांसगीत और उससे जुड़े पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इतिहास बेहद प्राचीन है। यह परंपरा लोकजीवन की अनुभूतियों, प्रकृति से जुड़ाव, उत्सवों और सामाजिक रीति-रिवाजों को अपने भीतर समेटे हुए है। इन गीतों के माध्यम से समुदाय की भावनाएं, संघर्ष, उल्लास और सामूहिकता का भाव सहज रूप में अभिव्यक्त होता है। इस लोक…
छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में स्थित भैयाथान केवल एक भौगोलिक नाम नहीं, बल्कि वीरता, त्याग और भाईचारे की ऐतिहासिक स्मृति को संजोए हुए है। इस नाम के पीछे दो भाइयों के अद्वितीय साहस और राज्य के प्रति उनकी निष्ठा की प्रेरक कहानी जुड़ी हुई है। 17वीं शताब्दी में सरगुजा राज्य की राजधानी रजधानी में थी। उस समय महाराज की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर कुछ विद्रोही तत्वों ने जसपुर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। जब इस घटना की सूचना रानी को मिली, तो उन्होंने तत्काल दो वीर भाइयों को इस संकट से निपटने का दायित्व सौंपा। रानी के आदेश पर दोनों…
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के पास स्थित कोरगांव अपने अनोखे “कुकुर मंदिर” के लिए जाना जाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वफादारी और समर्पण की ऐसी कहानी को संजोए हुए है, जो आज भी लोगों को भावुक कर देती है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र में बंजारा समुदाय के लोग अपने पशुओं के साथ निवास करते थे। वे जीविकोपार्जन के लिए गांव-गांव घूमते और कभी-कभी अपने धन-सामान को सुरक्षित रखने के लिए किसी विश्वसनीय व्यक्ति के पास गिरवी रख देते थे। इसी क्रम में एक बंजारे ने अपना कीमती सामान एक…
