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    Home»कहानियाँ»कोरबा की शान, भारत की जान: कबड्डी स्टार संजू देवी
    कहानियाँ

    कोरबा की शान, भारत की जान: कबड्डी स्टार संजू देवी

    हमर गोठBy हमर गोठNovember 27, 20253 Mins Read
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    Sanju Devi Kabaddi Player
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    हाल ही में हुए महिला कबड्डी विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की शानदार जीत के साथ, छत्तीसगढ़ की संजू देवी का नाम देश भर में छा गया है। कोरबा जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर संजू देवी ने न केवल भारत को लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ (Most Valuable Player) का प्रतिष्ठित खिताब भी अपने नाम किया।

    🏆 विश्व कप में यादगार प्रदर्शन

    संजू देवी एक रेडर (Raider) के तौर पर टीम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरीं। उनकी तेज़ गति, सटीक फुटवर्क और निडर रेडिंग ने विरोधी टीमों को लगातार मुश्किल में डाला।

    • अजेय अभियान: विश्व कप में भारत ने अपने सभी मैच जीतकर ख़िताब पर कब्ज़ा किया, जिसमें संजू देवी का प्रदर्शन निर्णायक रहा।
    • फाइनल की नायिका: फाइनल मैच में, जहाँ भारतीय टीम का मुकाबला चीनी ताइपे से था, संजू देवी ने अकेले 16 रेड अंक हासिल किए। मैच के 12वें मिनट में उनके द्वारा किया गया सुपर रेड (Super Raid) सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसमें उन्होंने एक ही बार में चार विरोधी खिलाड़ियों को आउट कर भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई।
    • पुरस्कार: उनके लगातार और शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ (MVP) चुना गया।

    🛤️ संघर्ष से सफलता तक का सफर

    संजू देवी का जीवन संघर्षों और अटूट इच्छाशक्ति की कहानी है।

    • मूल स्थान: संजू देवी छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली ब्लॉक के केराकछार गाँव की रहने वाली हैं।
    • गरीबी से लड़ाई: संजू के माता-पिता दैनिक वेतन भोगी मजदूर हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर थी। संजू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार जब उनके एक बैल की मृत्यु हो गई थी, तो उन्होंने दूसरे बैल की जगह खुद हल जोतकर खेत की जुताई में अपने पिता की मदद की थी।
    • माता-पिता का संबल: एक लड़की का कबड्डी जैसे खेल को चुनना समाज के लिए सहज नहीं था, लेकिन संजू के माता-पिता हमेशा उनके सपनों के लिए ढाल बनकर खड़े रहे। जब उनके जूते टूट जाते थे, तो पिता अपने लिए नए कपड़े न खरीदकर उनके लिए खेल के जूते ले आते थे।
    • प्रशिक्षण: उनकी प्रतिभा को देखते हुए, उन्हें कोरबा के एक स्पोर्ट्स क्लब और बाद में बिलासपुर में राज्य सरकार द्वारा संचालित बालिका आवासीय कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण मिला। उनके कोच दिल कुमार राठौर ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • अंतर्राष्ट्रीय सफर: संजू देवी छत्तीसगढ़ के 25 साल के इतिहास में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली कबड्डी खिलाड़ी हैं। उन्होंने मार्च 2025 में ईरान में आयोजित 6वीं महिला एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था।

    संजू देवी की यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर, देश के किसी भी कोने से निकला टैलेंट दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकता है। अभावों से निकलकर विश्व मंच पर चमकने वाली संजू देवी आज लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं।

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