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    Home»पर्यटन»भोरमदेव मंदिर: छत्तीसगढ़ का अलौकिक वास्तुशिल्प, प्राचीन इतिहास और आध्यात्मिक अनुभव का संगम
    पर्यटन

    भोरमदेव मंदिर: छत्तीसगढ़ का अलौकिक वास्तुशिल्प, प्राचीन इतिहास और आध्यात्मिक अनुभव का संगम

    हमर गोठBy हमर गोठDecember 7, 20233 Mins Read
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    भोरमदेव मंदिर
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    छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और प्राचीन इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। 11वीं शताब्दी में निर्मित, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है।

    वास्तुकला का अद्भुत नमूना:

    भोरमदेव मंदिर नागर शैली में बनाया गया है, जो उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की एक विशेष शैली है। मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, और इसकी नक्काशी और मूर्तियां अत्यंत सुंदर हैं। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसके शिखर है, जो तीन मंजिलों वाला एक विशाल संरचना है। शिखर के अंदर एक गर्भगृह है, जहां भगवान शिव का एक पवित्र लिंग है।

    प्राचीन इतिहास की गवाही:

    भोरमदेव मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी का है, और माना जाता है कि इसका निर्माण कलचुरी राजवंश के राजा करणदेव ने करवाया था। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग के साथ कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं, जो उस समय की मूर्तिकला कौशल का एक उदाहरण हैं।

    धार्मिक महत्व:

    भोरमदेव मंदिर शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। साल भर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। महाशिवरात्रि के त्योहार के दौरान, यहां एक भव्य मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    पर्यटन स्थल के रूप में:

    भोरमदेव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। इसकी अद्भुत वास्तुकला, प्राचीन इतिहास और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर के पास एक संग्रहालय भी है, जहां प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां प्रदर्शित हैं।

    आने का सबसे अच्छा समय:

    भोरमदेव मंदिर की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और मंदिर के दर्शन और आसपास के क्षेत्र का भ्रमण करने के लिए आदर्श होता है।

    यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

    • मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते चप्पल उतार दें।
    • मंदिर परिसर में शराब और मांस का सेवन वर्जित है।
    • मंदिर में शांति बनाए रखें और दूसरों की पूजा में बाधा न डालें।

    तो अगर आप छत्तीसगढ़ की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो भोरमदेव मंदिर को अपने गंतव्यों में जरूर शामिल करें। यह अद्भुत मंदिर आपको शांति, आध्यात्मिकता और इतिहास का एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगा।

    अतिरिक्त जानकारी:

    • भोरमदेव मंदिर कवर्धा शहर से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
    • मंदिर के पास ठहरने के लिए कई होटल और लॉज हैं।
    • मंदिर के पास कई स्थानीय रेस्तरां हैं, जहां आप छत्तीसगढ़ के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।

    आशा है कि यह जानकारी आपको भोरमदेव मंदिर की यात्रा करने में मददगार होगी।

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