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    Home»बस्तर»कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा
    बस्तर

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    हमर गोठBy हमर गोठJanuary 5, 20263 Mins Read
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    green gufa
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    छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और पाषाण कालीन गुफाओं के लिए जाना जाता है। हाल ही में खोजी गई ग्रीन गुफा (Green Cave) ने न केवल पर्यटकों बल्कि भू-वैज्ञानिकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।

    1. गुफा की उत्पत्ति और “हरा” रहस्य

    आम तौर पर गुफाएं अंधेरी और भूरे रंग की होती हैं, लेकिन इस गुफा की खासियत इसका पन्ना जैसा हरा रंग है।

    • वनस्पति का प्रभाव: गुफा के मुहाने और ऊपरी परतों पर नमी की अधिकता के कारण दुर्लभ किस्म के काई (Moss), शैवाल (Algae) और फर्न की मोटी परत जम गई है।
    • प्रकाश का खेल: जब सूरज की किरणें एक विशेष कोण से गुफा के प्रवेश द्वार पर पड़ती हैं, तो इन वनस्पतियों से परावर्तित होकर प्रकाश पूरी गुफा को हरे रंग की आभा से भर देता है।

    2. भूगर्भीय संरचना (Geological Formation)

    यह गुफा लाखों वर्षों की कार्स्ट (Karst) प्रक्रिया का परिणाम है। चूना पत्थर (Limestone) के क्षेत्रों में पानी के कटाव से बनी यह गुफा वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।

    • स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स: गुफा की छत से लटकती और जमीन से ऊपर की ओर बढ़ती चूना पत्थर की आकृतियाँ (Stalactites & Stalagmites) यहाँ भी मौजूद हैं।1
    • अनोखी बनावट: इस गुफा की संरचना कुटुंबसर गुफा से थोड़ी भिन्न है, क्योंकि यहाँ नमी का स्तर बहुत अधिक है, जो इसे जीवित (Living Cave) बनाए रखता है।

    3. जैव विविधता का केंद्र

    ग्रीन गुफा केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र है:

    • दुर्लभ जीव: यहाँ गुफाओं में रहने वाले विशेष झींगुर, चमगादड़ और कुछ ऐसी मछलियाँ देखी गई हैं जो बिना प्रकाश के रहने के लिए अनुकूलित हो चुकी हैं।
    • माइक्रो-क्लाइमेट: गुफा के अंदर का तापमान साल भर स्थिर रहता है, जिससे यहाँ बाहर के वातावरण से अलग सूक्ष्म जीव पनपते हैं।

    4. पर्यटन और रोमांच

    साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

    • दुर्गम रास्ता: घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण यहाँ पहुँचना अपने आप में एक चुनौती है।
    • शांति और एकांत: मुख्यधारा के पर्यटन स्थलों से दूर होने के कारण यहाँ की प्राकृतिक शांति अभी भी बरकरार है।

    पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

    विषयजानकारी
    सबसे अच्छा समयनवंबर से मार्च (मानसून के बाद)
    कैसे पहुँचेंजगदलपुर से लगभग 30-40 किमी की दूरी पर स्थित
    अनुमतिकांगेर घाटी वन विभाग से अनुमति और स्थानीय गाइड अनिवार्य है
    सावधानीगुफा के अंदर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, विशेषज्ञों के बिना अंदर न जाएँ

    निष्कर्ष

    ग्रीन गुफा की खोज यह साबित करती है कि बस्तर के जंगलों में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो दुनिया की नज़रों से ओझल है। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि शोधकर्ताओं को पृथ्वी के भीतर चल रही हलचलों को समझने का एक नया जरिया भी प्रदान करेगी।

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