Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Hamar GothHamar Goth
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe
    • होम
    • कहानियाँ
    • पर्यटन
    • संस्कृति
    • इतिहास
    • खान-पान
    • बस्तर
    Hamar GothHamar Goth
    Home»इतिहास»छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा का साक्षी: ताला का पुरातात्विक क्षेत्र
    इतिहास

    छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा का साक्षी: ताला का पुरातात्विक क्षेत्र

    हमर गोठBy हमर गोठDecember 15, 20234 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
    Tala
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    छत्तीसगढ़ की धरती इतिहास के अनछुए अध्यायों और प्राचीन सभ्यताओं के अवशेषों को अपने सीने में समेटे हुए है। इसी अनमोल विरासत का एक अलंकृत अध्याय है रायपुर जिले का ताला का पुरातात्विक क्षेत्र। महानदी नदी के तट पर बसा यह प्राचीन नगर हमें अतीत के सुनहरे पन्नों से रूबरू कराता है, जहां कला, संस्कृति और सभ्यता के शानदार अवशेष इतिहास के गवाह बनकर खड़े हैं।

    प्राचीनता का सफर:

    पुरातात्विक उत्खनन से पता चलता है कि ताला की धरती कम से कम 2000 वर्ष ईसा पूर्व से आबाद थी। यहां मिले अवशेष मौर्य, शुंग, सतवाहन, कुषाण और गुप्त काल के एक समृद्ध शहर की कहानी सुनाते हैं। मिट्टी के पात्र, सिक्के, मूर्तियां, शिलालेख और अन्य कलाकृतियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि ताला व्यापार, संस्कृति और कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

    कला और वास्तुकला का संगम:

    ताला का प्राचीन शहर विशाल और नियोजित था। मिट्टी, लकड़ी और पत्थर से बने भवनों, मंदिरों और स्तूपों के अवशेष इस बात की गवाही देते हैं। सबसे प्रभावशाली खोजों में से एक है तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का एक विशाल शिव मंदिर। उसकी संरचना और जटिल नक्काशी उस समय की कुशल शिल्पकारिता का प्रमाण है। इसके अलावा, बौद्ध स्तूप और गुफा मंदिर भी ताला की समृद्ध धार्मिक विरासत के साक्षी हैं।

    रुद्र शिव की भव्य मूर्ति:

    ताला की सबसे प्रभावशाली खोजों में से एक है शिव की भव्य मूर्ति। लगभग 6 फीट ऊंची यह मूर्ति काले पत्थर से बनी है और इसे रुद्र शिव की मुद्रा में दर्शाया गया है। मूर्ति की आकृति भव्य और शक्तिशाली है। उसके उग्र रूप को प्रकट करती हुई भौंहें, तीखी नजरें और मुंह के कोने पर हल्की सी मुस्कान एक अद्भुत सम्मोहन पैदा करती है। मूर्ति पर नृत्य करती हुई तिलचट्टियां और हाथ में त्रिशूल शिव के विनाशक और रक्षक दोनों रूपों को उजागर करते हैं। यह मूर्ति न केवल कलात्मक दृष्टि से अद्भुत है, बल्कि ताला के प्राचीन धार्मिक मान्यताओं का भी प्रतिनिधित्व करती है।

    मिट्टी के गीत:

    ताला से मिले कलाकृतियों में मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां और खिलौने खास महत्व रखते हैं। ये कलाकृतियां उस समय के जीवनशैली, धार्मिक मान्यताओं और कलात्मक अभिव्यक्ति की झलक दिखाती हैं। पंक्षियों, फूलों और ज्यामितीय आकृतियों की नक्काशी से सजे ये बर्तन उस समय की सांस्कृतिक समझ और सौंदर्य बोध को प्रदर्शित करते हैं।

    इतिहास के दस्तावेज:

    ताला से मिले शिलालेख और सिक्के इतिहासकारों के लिए अमूल्य स्रोत हैं। ब्राह्मी और संस्कृत लिपि में लिखे ये शिलालेख मौर्य, शुंग और सतवाहन शासकों के नाम और उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं। सिक्कों पर मिली छापें व्यापारिक मार्गों और क्षेत्र के आर्थिक महत्व की जानकारी देती हैं।

    संरक्षण और भविष्य की उम्मीद:

    ताला का पुरातात्विक क्षेत्र राष्ट्रीय महत्व का धरोहर स्थल है। भारतीय पुरातत्व विभाग इसे संरक्षित करने और पर्यटकों के लिए सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    खुदाई कार्य जारी है और नए-नए खोजों से ताला के इतिहास पर प्रकाश पड़ रहा है। हाल ही में 2020 में हुई खुदाई में एक भव्य जलकुंड भी सामने आया है, जो उस समय की जल प्रबंधन प्रणाली की जटिलता का प्रमाण है।

    हालांकि, कई चुनौतियां भी हैं। अतिक्रमण, अवैध उत्खनन और आर्थिक संसाधनों का अभाव इतिहास के इन गवाहों के लिए खतरा बन सकते हैं।

    हमारी जिम्मेदारी:

    ताला का पुरातात्विक क्षेत्र केवल खंडहरों का समूह नहीं है, बल्कि यह अतीत का जीवित साक्षी है। यह हमें प्राचीन काल के कला, संस्कृति और सभ्यता के बारे में जानकारी देता है और हमारी पहचान को बनाने में मदद करता है। इसलिए, यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि इस अमूल्य विरासत की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

    हम यह कैसे कर सकते हैं?

    • ताला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाएं।
    • अवैध उत्खनन और क्षति से क्षेत्र की रक्षा करें।
    • क्षेत्र के रखरखाव और संरक्षण के लिए आर्थिक और मानवीय संसाधन जुटाएं।
    • ताला को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसकी सुंदरता और महत्व के बारे में पता चल सके।
    • स्थानीय समुदाय को विरासत संरक्षण में शामिल करें ताकि वे अपनी पहचान को समझें और उसकी रक्षा करें।

    ताला का पुरातात्विक क्षेत्र छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति का एक अनमोल खजाना है। रूद्र शिव की भव्य मूर्ति, जलकुंड के अवशेष और अनेक अन्य कलाकृतियां हमें अपने समृद्ध अतीत की याद दिलाती हैं। इस क्षेत्र की रक्षा और संवर्धन करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सभी मिलकर इस दिशा में काम कर सकते हैं और इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकते हैं, ताकि वे भी अतीत के गौरव गाथा को सुन सकें और छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत पर गर्व कर सकें।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email

    Related Posts

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    कोरिया महल: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और राजसी वैभव का प्रतीक

    December 26, 2025

    चक्रधर समारोह: कला और संस्कृति का महाकुंभ

    August 27, 2025

    उल्टा पानी: प्रकृति का एक अनोखा चमत्कार

    August 22, 2025

    मछली प्वाइंट, मैनपाट: प्रकृति का अद्भुत जलप्रपात

    August 22, 2025

    ठिनठिनी पत्थर: सरगुजा का अद्भुत रहस्य

    August 22, 2025
    Demo
    Top Posts

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Don't Miss

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और पाषाण…

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025

    कोरिया महल: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और राजसी वैभव का प्रतीक

    December 26, 2025
    Stay In Touch
    • Facebook
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    Latest Reviews
    Demo
    //

    We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

    Most Popular

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Our Picks

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.