Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Hamar GothHamar Goth
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe
    • होम
    • कहानियाँ
    • पर्यटन
    • संस्कृति
    • इतिहास
    • खान-पान
    • बस्तर
    Hamar GothHamar Goth
    Home»इतिहास»छत्तीसगढ़ में सोमवंशी राजवंश: स्वर्णिम युग का सूर्योदय (750 ईस्वी – 1200 ईस्वी)
    इतिहास

    छत्तीसगढ़ में सोमवंशी राजवंश: स्वर्णिम युग का सूर्योदय (750 ईस्वी – 1200 ईस्वी)

    हमर गोठBy हमर गोठDecember 9, 20233 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
    Somavanshi Dynasty in Chhattisgarh
    Somavanshi Dynasty in Chhattisgarh
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    छत्तीसगढ़ के इतिहास में सोमवंशी राजवंश का शासनकाल एक स्वर्णिम युग के रूप में जाना जाता है। लगभग 750 ईस्वी से 1200 ईस्वी तक शासन करने वाले सोमवंशी राजाओं ने छत्तीसगढ़ को कला, वास्तुकला, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में नए आयामों तक पहुँचाया। इस लेख में, हम सोमवंशी राजवंश के शासनकाल और छत्तीसगढ़ पर उनके प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

    सोमवंशी राजवंश का उदय:

    सोमवंशी राजवंश छत्तीसगढ़ में सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक था। इस वंश के संस्थापक शिवगुप्त बालार्जुन थे, जिन्होंने रायपुर जिले के तुर्रेकला को अपनी राजधानी बनाया। सोमवंशी राजाओं ने छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों पर शासन किया और अपने शासनकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।

    कला और वास्तुकला का उत्थान:

    सोमवंशी राजवंश कला और वास्तुकला के महान संरक्षक थे। इस समय कई भव्य मंदिरों, किलों और अन्य संरचनाओं का निर्माण हुआ। सोमवंशी शैली में बने मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं। छत्तीसगढ़ में स्थित सोमवंशी शैली के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों में राजिम का राजीव लोचन मंदिर, खल्लारी का गंडेश्वर मंदिर और बारनवापारा का शिव मंदिर शामिल हैं।

    साहित्य का विकास:

    सोमवंशी राजवंश के शासनकाल में साहित्य का भी काफी विकास हुआ। इस समय संस्कृत भाषा में कई ग्रंथों की रचना हुई। सोमवंशी राजाओं ने विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया, जिससे साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हुआ।

    धर्म का प्रसार:

    सोमवंशी राजवंश के शासनकाल में हिंदू धर्म का प्रसार हुआ। इस समय कई मंदिरों का निर्माण हुआ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को बढ़ावा दिया गया। सोमवंशी राजाओं ने धार्मिक सहिष्णुता का भी पालन किया और अन्य धर्मों को भी स्वतंत्र रूप से पनपने दिया।

    अर्थव्यवस्था का विकास:

    सोमवंशी राजवंश के शासनकाल में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था भी काफी विकसित हुई। कृषि और व्यापार को बढ़ावा दिया गया, जिससे राज्य की समृद्धि में वृद्धि हुई। व्यापारियों के लिए व्यापार मार्ग सुरक्षित हो गए, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

    सोमवंशी राजवंश का पतन:

    सोमवंशी राजवंश का पतन 1200 ईस्वी के आसपास हुआ। उनके पतन के कारणों में उनके साम्राज्य का विस्तार होना, आंतरिक संघर्ष और बाहरी हमले शामिल थे।

    छत्तीसगढ़ के इतिहास में सोमवंशी राजवंश का महत्व:

    छत्तीसगढ़ के इतिहास में सोमवंशी राजवंश का अमूल्य योगदान है। इस राजवंश के शासनकाल ने छत्तीसगढ़ को कला, वास्तुकला, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में नए आयामों तक पहुँचाया। आज भी, सोमवंशी राजवंश के शासनकाल के अवशेष, जैसे कि भव्य मंदिर, किले और मूर्तियाँ, छत्तीसगढ़ के गौरवमयी अतीत की गवाही देते हैं।

    छत्तीसगढ़ के लोग सोमवंशी राजवंश को अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखते हैं। सोमवंशी राजाओं की उपलब्धियां आज भी लोगों को प्रेरणा देती हैं।


    छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक सोमवंशी राजवंश के शासनकाल के अवशेषों को देख सकते हैं और छत्तीसगढ़ के समृद्ध इतिहास के बारे में अधिक जान सकते हैं। सोमवंशी राजवंश का शासनकाल छत्तीसगढ़ के लोगों को गर्व और प्रेरणा देता है।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email

    Related Posts

    कोरिया महल: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और राजसी वैभव का प्रतीक

    December 26, 2025

    चक्रधर समारोह: कला और संस्कृति का महाकुंभ

    August 27, 2025

    बारसूर: इंद्रावती के तट पर हिंदू सभ्यता का खोया हुआ नगर

    January 14, 2024

    भगवान गणेश की प्रतिमा: राजबेड़ा में सौ साल पहले पहिए टूटे और स्थापना

    January 13, 2024

    छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा का साक्षी: ताला का पुरातात्विक क्षेत्र

    December 15, 2023

    भोरमदेव: छत्तीसगढ़ का वीर योद्धा

    December 10, 2023
    Demo
    Top Posts

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Don't Miss

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और पाषाण…

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025

    कोरिया महल: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और राजसी वैभव का प्रतीक

    December 26, 2025
    Stay In Touch
    • Facebook
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    Latest Reviews
    Demo
    //

    We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

    Most Popular

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Our Picks

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025

    कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

    December 26, 2025

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.