हमारे रायपुर शहर में एक से बढ़कर एक योग्य और प्रतिभाशाली लोग हुए हैं, जिन्होंने देश और दुनिया में खूब नाम कमाया है। भूतनाथ डे इस शहर के पहले वरिष्ठ (सियान) वकील और नगर पालिका के सभापति थे। यह एक ऐतिहासिक और गौरवमयी तथ्य है कि उन्हीं के घर में स्वामी विवेकानंद (नरेंद्रनाथ दत्त) के माता-पिता और भाई-बहन करीब दो साल तक रहे थे।
इसी परिवार के हरिनाथ डे जी का भाषा और साहित्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा नाम था। वे 36 अलग-अलग भाषाओं के जानकार (बहुभाषी) थे। विडंबना देखिए कि महज़ 33 वर्ष की अल्पायु में तेज़ बुखार (जर बुखार) आने के कारण उनका निधन हो गया।
अपने जीवनकाल में उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा, वे कलकत्ता स्थित ‘राष्ट्रीय पुस्तकालय’ (नेशनल लाइब्रेरी) के पहले भारतीय लाइब्रेरियन (ग्रंथपाल) भी बने थे। उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता का आलम यह था कि तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन ने भी उनकी जमकर प्रशंसा की थी।
रायपुर के बुढ़ापारा इलाके में स्थित ‘डे भवन’ आज भी हमें इन तमाम पुरानी और गौरवशाली बातों की याद दिलाता हुआ खड़ा है। इस भवन और इससे जुड़े लोगों का यह इतिहास वर्ष 1877 का है। ऐसी और भी न जाने कितनी अनगिनत यादें हमारा रायपुर शहर अपने भीतर समेटे हुए है और हमें उनकी याद दिलाता है, जो हम सभी के लिए बेहद गर्व की बात है।

