Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    दंतेवाड़ा के ‘धन्वंतरि’: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले

    January 27, 2026

    बड़ी दीदी: बुधरी ताती नक्सलगढ़ में जलती सेवा की मशाल

    January 27, 2026

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Hamar GothHamar Goth
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe
    • होम
    • कहानियाँ
    • पर्यटन
    • संस्कृति
    • इतिहास
    • खान-पान
    • बस्तर
    Hamar GothHamar Goth
    Home»इतिहास»चक्रधर समारोह: कला और संस्कृति का महाकुंभ
    इतिहास

    चक्रधर समारोह: कला और संस्कृति का महाकुंभ

    हमर गोठBy हमर गोठAugust 27, 20253 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
    Chakradhar Samaroh
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हर साल गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित होने वाला “चक्रधर समारोह” एक ऐसा सांस्कृतिक उत्सव है, जो कला, संगीत और साहित्य के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह समारोह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि संगीत सम्राट महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और उनके योगदान को श्रद्धांजलि है।

    इतिहास और ऐतिहासिक महत्व

    चक्रधर समारोह का अपना एक गहरा ऐतिहासिक महत्व भी है। आजादी से पहले, रायगढ़ एक स्वतंत्र रियासत थी, जो अपनी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध थी। इसी रियासत से प्रसिद्ध संगीतज्ञ कुमार गंधर्व और हिंदी के पहले छायावादी कवि मधुकर पांडेय जैसे महान कलाकार जुड़े थे। जब सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से रियासतों के भारत में विलीनीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, तो रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह विलीनीकरण के सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पहले शासकों में से एक थे।

    महाराजा चक्रधर सिंह न केवल एक कुशल शासक थे, बल्कि वे एक महान संगीतज्ञ और कला पारखी भी थे। उनके प्रयासों और प्रोत्साहन के कारण ही संगीत और नृत्य की एक नई शैली विकसित हुई। वे स्वयं एक कुशल तबला वादक, नर्तक और लेखक थे। उनके दरबार में देश के जाने-माने कलाकार आते-जाते रहते थे। उन्होंने कथक की लखनऊ और जयपुर शैलियों के सम्मिश्रण से “रायगढ़ घराना” नामक कथक की एक नई शैली को जन्म दिया।

    समारोह का उदय

    स्वतंत्रता-पूर्व काल से ही गणेशोत्सव के समय यहां सांस्कृतिक आयोजनों की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई, जिसने धीरे-धीरे एक बड़े महोत्सव का रूप ले लिया। यह आयोजन इतना वृहद था कि राजा चक्रधर सिंह के निधन के बाद उनकी याद में “चक्रधर समारोह” के नाम से यहां के कलासाधकों ने वर्ष 1985 से दस दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत की। इस समारोह ने देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर छत्तीसगढ़ को स्थापित करने में बड़ी मदद की। 2001 से, जिला प्रशासन ने इस आयोजन का जिम्मा संभाला और इसे एक व्यापक स्वरूप प्रदान किया है।

    कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

    चक्रधर समारोह में हर साल देश-विदेश के शीर्षस्थ कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोक कलाओं, काव्य पाठ और नाटकों का यह अनूठा मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है। कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य जैसे कर्मा और पंडवानी भी इस समारोह का हिस्सा बनते हैं। इसके अलावा, समारोह में कुश्ती और कबड्डी जैसी पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है, जो महाराजा चक्रधर सिंह के खेल प्रेम को दर्शाते हैं।

    रायगढ़ की पहचान

    चक्रधर समारोह ने रायगढ़ को “छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी” के रूप में एक नई पहचान दी है। यह समारोह न केवल कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का भी एक माध्यम है। हर साल गणेश चतुर्थी के समय रायगढ़ शहर रोशनी से जगमगा उठता है और पूरा शहर कला के रंग में डूब जाता है। यह समारोह कला प्रेमियों के लिए एक ऐसा अवसर है, जहां वे एक ही मंच पर देश की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव कर सकते हैं।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email

    Related Posts

    कोरिया महल: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और राजसी वैभव का प्रतीक

    December 26, 2025

    छत्तीसगढ़ की गोदना परंपरा: शरीर पर उकेरा गया अमर शृंगार

    September 12, 2025

    बस्तर में कृषि संस्कृति का महापर्व: जगार

    September 12, 2025

    राजिम कुंभ कल्प: छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’, आस्था और संस्कृति का महासंगम

    February 8, 2025

    बस्तर दशहरा का काछनगादी अनुष्ठान: देवी काछन की पूजा और सांस्कृतिक धरोहर

    October 5, 2024

    बारसूर: इंद्रावती के तट पर हिंदू सभ्यता का खोया हुआ नगर

    January 14, 2024
    Demo
    Top Posts

    दंतेवाड़ा के ‘धन्वंतरि’: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले

    January 27, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Don't Miss

    दंतेवाड़ा के ‘धन्वंतरि’: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले

    January 27, 2026

    डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले का नाम छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग…

    बड़ी दीदी: बुधरी ताती नक्सलगढ़ में जलती सेवा की मशाल

    January 27, 2026

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    छत्तीसगढ़ के माथे पर ‘रामसर’ का तिलक: कोपरा जलाशय बना प्रदेश की पहली ग्लोबल वेटलैंड

    December 28, 2025
    Stay In Touch
    • Facebook
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    Latest Reviews
    Demo
    //

    We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

    Most Popular

    दंतेवाड़ा के ‘धन्वंतरि’: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले

    January 27, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Our Picks

    दंतेवाड़ा के ‘धन्वंतरि’: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले

    January 27, 2026

    बड़ी दीदी: बुधरी ताती नक्सलगढ़ में जलती सेवा की मशाल

    January 27, 2026

    कांगेर घाटी की “ग्रीन गुफा”: बस्तर का एक नया प्राकृतिक अजूबा

    January 5, 2026

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.