Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Hamar GothHamar Goth
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe
    • होम
    • कहानियाँ
    • पर्यटन
    • संस्कृति
    • इतिहास
    • खान-पान
    • बस्तर
    Hamar GothHamar Goth
    Home»रोचक»छत्तीसगढ़ की गोदना परंपरा: शरीर पर उकेरा गया अमर शृंगार
    रोचक

    छत्तीसगढ़ की गोदना परंपरा: शरीर पर उकेरा गया अमर शृंगार

    हमर गोठBy हमर गोठSeptember 12, 20253 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
    गोदना
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    छत्तीसगढ़ की गोदना परंपरा (Godna Tradition) केवल शारीरिक सजावट का माध्यम नहीं है, बल्कि यह यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और गहरी आस्था का प्रतीक है। इसे छत्तीसगढ़ के लोकजीवन में एक अमर शृंगार माना जाता है, जो मृत्यु के बाद भी व्यक्ति के साथ जाता है।

    गोदना: इतिहास और महत्व

    गोदना शब्द का शाब्दिक अर्थ है “चुभाना” या “छेदना”। इस कला में, त्वचा पर सुई चुभोकर उसमें प्राकृतिक रंगों (जैसे- काजल, तेल या वनस्पति के रस) से बने लेप को भरा जाता है। यह एक प्रकार का स्थायी टैटू है, जिसे सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की महिलाएं अपनाती आ रही हैं।

    गोदना का महत्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक मान्यताएं हैं:

    • अमर गहना: मान्यता है कि मृत्यु के बाद सभी सांसारिक वस्तुएं, यहाँ तक कि गहने भी, यहीं रह जाते हैं, लेकिन गोदना ही एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति के साथ स्वर्ग तक जाती है।
    • पहचान और सुरक्षा: अलग-अलग जनजातियों और समुदायों में गोदने के खास प्रतीक और डिजाइन होते हैं, जो उनकी पहचान को दर्शाते हैं। माना जाता है कि ये चिह्न बुरी शक्तियों और बुरी नजर से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
    • चिकित्सीय लाभ: कुछ समुदायों में यह भी माना जाता है कि गोदना एक्यूप्रेशर की तरह काम करता है, जो शरीर के दर्द और कुछ बीमारियों से राहत दिलाने में सहायक होता है।
    • रामनामी समाज: छत्तीसगढ़ में रामनामी समाज एक विशेष उदाहरण है, जहाँ लोग अपने पूरे शरीर पर भगवान राम का नाम गुदवाते हैं। यह प्रथा धार्मिक भक्ति और सामाजिक समानता का प्रतीक है, जो भेदभाव को चुनौती देती है।

    गोदना के प्रकार और प्रतीक

    छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों में गोदना के अलग-अलग प्रकार और प्रतीक हैं। उदाहरण के लिए:

    • गोंड जनजाति: इनके लोग अपने माथे पर त्रिशूल का चिह्न गुदवाते हैं, जो शिव का प्रतीक है।
    • बैगा जनजाति: बैगा महिलाएं अक्सर अपनी पीठ पर मोर का चिह्न गुदवाती हैं। उनके घुटने पर सूर्य का चिह्न भी अंकित होता है, जिसे वे “दवरी” कहती हैं।
    • कोल जनजाति: कोल समुदाय के लोग अपनी कलाई पर मोर का चिह्न गुदवाते हैं।
    • अन्य प्रतीकों में बिच्छू, फूल-पत्तियां, देवी-देवताओं की आकृतियाँ और जानवरों के चित्र शामिल होते हैं।

    आजकल, जहाँ एक ओर गोदना की पारंपरिक कला लुप्त होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ कलाकारों ने इसे आधुनिक रूप देकर कपड़ों और अन्य वस्तुओं पर उकेरना शुरू किया है। इससे न केवल इस कला को नया जीवन मिला है, बल्कि यह कलाकारों के लिए आय का साधन भी बन रहा है।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email

    Related Posts

    सांस्कृतिक परंपरा में बांसगीत: समाज और लोकजीवन का दर्पण

    April 8, 2026

    वफादारी की मिसाल: कोरगांव का कुकुर मंदिर

    April 2, 2026

    विवाह की रौनक थे भड़ौनी गीत, अब परंपरा हो रही ओझल

    April 1, 2026

    उरांव जनजाति का प्रमुख पर्व: सरहुल

    April 1, 2026

    बस्तर में कृषि संस्कृति का महापर्व: जगार

    September 12, 2025

    चक्रधर समारोह: कला और संस्कृति का महाकुंभ

    August 27, 2025
    Demo
    Top Posts

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Don't Miss

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    छत्तीसगढ़ के बड़े डोंगर क्षेत्र में स्थित नकटी देवरली एक ऐसी प्राचीन धरोहर है, जो…

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026

    सांस्कृतिक परंपरा में बांसगीत: समाज और लोकजीवन का दर्पण

    April 8, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    Latest Reviews
    Demo
    //

    We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

    Most Popular

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Our Picks

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.