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Author: हमर गोठ
छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा कही जाने वाली अरपा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का सजीव प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में इसका उल्लेख विशेष महत्व के साथ किया गया है, जो इसे धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पवित्र बनाता है। अरपा नदी का प्राचीन नाम ‘कृपा’ बताया जाता है। पुराणों में इसे पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली नदी के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि इस नदी का उद्गम पवित्र पर्वतों से हुआ है और इसका जल जीवनदायी शक्ति से परिपूर्ण है। समय के साथ इसका नाम परिवर्तित होकर अरपा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में स्थित राजपुर क्षेत्र अपने भीतर धार्मिक आस्था, प्राचीन इतिहास और प्राकृतिक विरासत का अद्भुत संगम समेटे हुए है। यहां के देवालय, गुफाएं और पुरातात्विक अवशेष न केवल स्थानीय श्रद्धा के केंद्र हैं, बल्कि इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। राजपुर से दक्षिण दिशा में लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर गेजर नदी के तट पर स्थित ‘राजपुर कोठी’ एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। ओगना गांव के समीप स्थित यह स्थान प्राचीन शिव मंदिरों और शिल्पकला के अवशेषों के लिए जाना जाता है। यहां पत्थरों…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक व्यंजनों की श्रृंखला में झांझी मुठिया एक ऐसा स्वाद है, जो न केवल स्थानीय खानपान का अभिन्न हिस्सा है, बल्कि साल भर घर-घर में पसंद किया जाता है। सरल सामग्री, कम समय और पारंपरिक विधि से तैयार होने वाला यह व्यंजन ग्रामीण जीवन की सादगी और पोषण का प्रतीक है। झांझी मुठिया मुख्यतः चावल के आटे से बनाया जाता है और इसका स्वाद हल्का, सुपाच्य और बेहद संतुलित होता है। यही कारण है कि यह हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है। विशेष रूप से सुबह के नाश्ते या हल्के भोजन के रूप…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में विवाह की पहचान माने जाने वाले भड़ौनी गीत अब धीरे-धीरे परंपरा से ओझल होते जा रहे हैं। कभी बारात के स्वागत से लेकर हर प्रमुख रस्म तक इन गीतों की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन आज आधुनिक संगीत और डीजे संस्कृति ने इस लोक परंपरा को पीछे धकेल दिया है। पुराने समय में जब बारात वधू पक्ष के घर पहुंचती थी, तब गीतों के माध्यम से उसका स्वागत होता था। भड़ौनी गीत केवल गाए नहीं जाते थे, बल्कि वे संवाद का माध्यम भी होते थे, जहां दोनों पक्षों के युवक-युवतियां हंसी-मजाक और व्यंग्य के…
रायपुर। प्रकृति और संस्कृति के अद्वितीय संगम का प्रतीक सरहुल पर्व उरांव जनजाति का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हर वर्ष चैत्र मास में पूरे उत्साह और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार और सामुदायिक एकता का जीवंत उदाहरण है। सरहुल का संबंध धरती और सूर्य की उपासना से जुड़ा हुआ है। जनजातीय मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक मिलन का उत्सव है, जिससे सृष्टि में नवजीवन और उर्वरता का संचार होता है। इसी कारण इसे नई फसल और प्राकृतिक नवोत्थान…
डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले का नाम छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में सेवा, समर्पण और निस्वार्थ चिकित्सा का पर्याय बन चुका है। बस्तर के हीरानार स्थित ‘विवेकानंद आरोग्य धाम’ के माध्यम से इस दंपति ने पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से वनवासियों के जीवन में स्वास्थ्य का उजियारा फैलाया है। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारत सरकार द्वारा इन दोनों को संयुक्त रूप से पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित करने की घोषणा, इनके वर्षों के कठिन परिश्रम का फल है। मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले…
बस्तर के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को स्थानीय लोग सम्मान और स्नेह से ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारते हैं। पिछले चार दशकों (लगभग 40 वर्षों) से वे अबूझमाड़ और वनांचल के उन दुर्गम इलाकों में काम कर रही हैं, जहाँ कभी बुनियादी सुविधाओं का पहुंचना भी एक सपना था। 1. बचपन और सेवा का संकल्प बुधरी ताती की सेवा यात्रा मात्र 15 वर्ष की आयु में शुरू हुई थी। उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा हीरानार के ही गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से मिली। समाज सेवा के प्रति उनकी ललक इतनी तीव्र थी…
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और पाषाण कालीन गुफाओं के लिए जाना जाता है। हाल ही में खोजी गई ग्रीन गुफा (Green Cave) ने न केवल पर्यटकों बल्कि भू-वैज्ञानिकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। 1. गुफा की उत्पत्ति और “हरा” रहस्य आम तौर पर गुफाएं अंधेरी और भूरे रंग की होती हैं, लेकिन इस गुफा की खासियत इसका पन्ना जैसा हरा रंग है। 2. भूगर्भीय संरचना (Geological Formation) यह गुफा लाखों वर्षों की कार्स्ट (Karst) प्रक्रिया का परिणाम है। चूना पत्थर (Limestone) के क्षेत्रों में पानी के कटाव से बनी…
बिलासपुर (छत्तीसगढ़): प्रकृति प्रेमियों और छत्तीसगढ़ के वासियों के लिए 12 दिसंबर 2025 का दिन गौरव का नया सूरज लेकर आया। बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय (Kopra Reservoir) अब केवल एक सिंचाई बांध नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी ‘रामसर साइट’ बन गया है। ईरान के रामसर कन्वेंशन से मिली इस वैश्विक मान्यता ने छत्तीसगढ़ को दुनिया के उन चुनिंदा नक्शों पर ला खड़ा किया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित हैं। सात समंदर पार से आते मेहमानों का ‘घर’ बिलासपुर शहर से महज 15 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के साकरी गांव के पास स्थित यह जलाशय अपनी…
छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की प्रतिभाशाली बालिका योगिता मंडावी ने जूडो खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोण्डागांव में पली-बढ़ी योगिता को उनकी उल्लेखनीय खेल उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा योगिता मंडावी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में देशभर से चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों जैसे खेल, नवाचार, सामाजिक सेवा, कला एवं संस्कृति आदि में…
