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Author: हमर गोठ
सरगुजा जिले की गोद में बसा, मैनपाट एक ऐसा हिल स्टेशन है, जो छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है। समुद्र तल से 1,085 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, इस हिल स्टेशन को ‘छोटा शिमला’ भी कहा जाता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, अनोखी घटनाओं, धार्मिक महत्व, सांस्कृतिक अनुभव और रोमांचक गतिविधियों के अनूठे मिश्रण के साथ, मैनपाट हर तरह के यात्री को आकर्षित करता है। प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव: मैनपाट को प्रकृति की अद्भुत रचनाओं का खजाना कहा जा सकता है। घने जंगलों, लुभावने झरनों, मनोरम घाटियों और पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य मैनपाट की सुंदरता…
छत्तीसगढ़ राज्य के धमतरी जिले में स्थित बिलाई माता मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है और इसे छत्तीसगढ़ का एक शक्तिपीठ माना जाता है। बिलाई माता मंदिर एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था। मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है और यह मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मंदिर का मुख्य द्वार उत्तर की ओर है और इसमें तीन गर्भगृह हैं। मंदिर के गर्भगृह में देवी दुर्गा की एक भव्य प्रतिमा स्थापित है। बिलाई माता मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है…
छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। यह उद्यान 1982 में स्थापित किया गया था और इसका क्षेत्रफल 200 वर्ग किलोमीटर है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां साल, सागौन, टीक और बांस के घने जंगल हैं। इन जंगलों में बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, चीता, जंगली बिल्ली, सियार, नीलगाय, सांभर, बारहसिंगा, हिरण, और कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। यहां तीन गुफाएं भी हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भूगर्भीय महत्व के लिए…
मदकू द्वीप शिवनाथ नदी की धारा के दो भागों मे विभक्त होने से द्वीप के रूप मे प्रकृतिक सौन्दर्य परिपूर्ण अत्यंत प्राचीन रमणीय स्थान है। इस द्वीप पर प्राचीन शिव मंदिर एवं कई स्थापत्य खंड हैं। लगभग 10वीं 11वीं सदी के दो अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर इस द्वीप पर स्थित है। इनमे से एक धूमनाथेश्वर तथा इसके दाहिने ओर उत्तर दिशा में एक प्राचीन जलहरी स्थित है जिससे पानी का निकास होता है। इसी स्थान पर दो प्राचीन शिलालेख मिले हैं। पहला शिलालेख लगभग तीसरी सदी ई॰ का ब्राम्ही शिलालेख है। इसमें अक्षय निधि एवं दूसरा शिलालेख शंखलिपि के अक्षरों…
छत्तीसगढ़ में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर बसा शिवरीनारायण धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। इस स्थान की महत्ता इस बात से पता चलती है कि देश के चार प्रमुख धाम बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम के बाद इसे पांचवे धाम की संज्ञा दी गई है। यह स्थान भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान है इसलिए छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां प्रभु राम का नारायणी रूप गुप्त रूप से विराजमान है इसलिए यह गुप्त तीर्थधाम या गुप्त प्रयागराज के नाम से भी जाना जाता है। शबरी और नारायण के अटूट…
सरगुजा जिले में कई सारे पर्यटन स्थल है जो अपने साथ कई कहानियाँ समेटे हुए है, उन्हीं में से एक है रामगढ़ पहाड़ी यह मुख्यरूप से प्राचीनतम नाट्यशाला और महाकाव्य मेघदूत का रचना स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि महाराज राजा भोज से हुई कहा-सुनी के पश्चात कालिदास उज्जैन छोड़कर सरगुजा चले गए थे और वहीं पर बस गए थे। छत्तीसगढ़ के इस जिले में हाथी के आकार की एक बड़ी सी चट्टान रूपी पहाड़ी है जिसे रामगढ़ के नाम से जाना जाता है। इस पहाड़ी में अनेक गुफाएँ बनी हुई हैं, जिनमें से एक कालिदास से संबंधित…
गेड़ी नृत्य छत्तीसगढ़ का पुरातन व पारंपरिक लोक नृत्य है। यह हरेली पर्व से जुड़ा हुआ लोक नृत्य है। अंचल का प्रथम पर्व है। इस दौरान गेड़ी का विशेष महत्व होता है। गेड़ी बांस से तैयार की जाती है। इसकी ऊंचाई 6 से 7 फीट होती है ऊंचाई पर पैर रखने के लिए नारियल की रस्सी से बांस की खपच्ची बांधी जाती है और गेड़ी को तैयार किया जाता है। गेड़ी में चढ़कर लय व ताल से गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। इसके साथ शारीरिक संतुलन बनाये रखते हुये पद संचालन करते हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के…
बस्तर के आदिवासियों की धार्मिक मान्यताएं उनके अपने पुरातन विश्वासों एवं हिन्दुओं के निकट सम्पर्क से पड़े प्रभाव का मिलाजुला बहुत ही जटिल रूप है। बस्तर का क्षेत्र इतना बड़ा है और लोग इतनी विविधता लिये हैं कि किसी एक धारणा को सम्पूर्ण बस्तर पर लागू करना अतिसाधारिणीकरण होगा। यहाँ के निवासियों में आज भी विशुद्ध आदिवासी विश्वासों से लेकर हिन्दू मान्यताओं के मिश्रण के अनेक चरण एक साथ देखे जा सकते हैं। इसका सबसे रोचक तथ्य यह है कि यहाँ विश्वास और मान्यताएं केवल आदिवासियों द्वारा हिन्दुओं से नहीं ली गयी हैं बल्कि यहाँ बसने वाली हिन्दू जातियां भी…
पंथी नृत्य सतनाम-पंथ का एक आध्यात्मिक और धार्मिक नृत्य होने के साथ-साथ एक अनुष्ठान भी है। सामूहिक अराधना है। यह वाह्य-स्वरूप में मनोरंजन एवं अन्तःस्वरूप में आध्यात्मिक साधना है। पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनामी समुदाय का प्रमुख नृत्य है। पंथी गीतों में गुरु घासीदास के चरित्र गायन किया जाता है। इसमे आद्यात्मिक सन्देश के साथ मानव जीवन की महत्ता होती है। इसमे रैदास, कबीर तथा दादू आदि संतों के आध्यात्मिक संदेश भी इसमें पाया जाता है। यह नृत्य दिसम्बर माह के 18 तारीख से शुरू होता है जो कि परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा का जन्म दिवस है।इसी दिन जैतखाम…
उन दिनों सोनाखान एक रियासत के रूप में जानी जाती थी। जो आजकल छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में आता है। जहां के बिंझवार जमीदार परिवार में वीर नारायण सिंह का जन्म 1795 में हुआ था। बचपन से ही वीर नारायण सिंह को वीरता देशभक्ति और निडरता अपने पिता से विरासत में मिली थी। बचपन से ही वह धनुष बाण, मल्लयुद्ध, तलवारबाजी, घुड़सवारी और बंदूक चलाने में महारत हासिल कर चुके थे। अंग्रेज उनके शौर्य से डरे हुए थे। नारायण सिंह से वीर नारायण सिंह बनने की कहानीदरअसल वर्तमान छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के सोनाखान इलाके के एक बड़े…
