Author: हमर गोठ

हाल ही में छत्तीसगढ़ के एक युवा राजशेखर पैरी ने देश का मान बढ़ाया है। उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित निजी एयरोस्पेस कंपनी टाइटंस स्पेस इंडस्ट्रीज (TSI) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना है। यह न केवल छत्तीसगढ़ के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। कौन हैं राजशेखर पैरी? राजशेखर पैरी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंड्रा कस्बे से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म बिलासपुर में हुआ और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं से शुरू की। उन्होंने पांचवीं से दसवीं तक की पढ़ाई पेंड्रा रोड स्थित ऑक्सफोर्ड पब्लिक…

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भारतीय एथलेटिक्स में एक नया नाम तेज़ी से उभर रहा है, और वह है अनिमेष कुजूर का। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के एक छोटे से गांव घुईटांगर से ताल्लुक रखने वाले 21 वर्षीय इस युवा धावक ने अपनी मेहनत और लगन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। हालिया उपलब्धियां और रिकॉर्डहाल ही में, अनिमेष ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। यह न सिर्फ उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, बल्कि उन्होंने इस दौड़ को 20.32 सेकंड में पूरा कर भारत का नया…

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छत्तीसगढ़, जिसे अक्सर अपनी घनी हरियाली और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, अब एक ऐसे अद्भुत रहस्य का अनावरण कर रहा है जो हमें करोड़ों साल पुराने इतिहास में ले जाता है – “गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क”। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के आमाखेरवा में हसदेव नदी के किनारे स्थित यह पार्क, न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क बनने की ओर अग्रसर है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे कभी यह भू-भाग गहरे समुद्र का हिस्सा हुआ करता था। एक भूगर्भीय खजाना: इस समुद्री जीवाश्म पार्क में 25 से 29 करोड़…

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विनोद कुमार शुक्ल, समकालीन हिंदी साहित्य के एक महान हस्ताक्षर, को हाल ही में 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण आवाज़ के रूप में उनकी स्थिति को और भी मजबूत करता है। यहाँ उनके उल्लेखनीय करियर पर एक नज़र है: विनोद कुमार शुक्ल जी का हिंदी साहित्य में योगदान गहरा है, और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होना उनकी असाधारण प्रतिभा का एक योग्य सम्मान है।

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मधेश्वर पहाड़, छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लॉक में स्थित एक अद्वितीय प्राकृतिक संरचना है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी शिवलिंग के आकार की आकृति है, जिसके कारण इसे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए भी एक खास जगह बन गया है। भौगोलिक संरचना और उत्पत्ति: मधेश्वर पहाड़ एक विशाल चट्टान है, जो लगभग 85 फीट ऊँचा और 105 फीट गोलाकार है। इसकी ढलानदार आकृति और शिखर का आकार बिल्कुल एक शिवलिंग जैसा है, जो…

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राजिम कुंभ कल्प, छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सव है, जो प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक लगभग 15 दिनों के लिए आयोजित किया जाता है। यह पवित्र संगम छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम नामक स्थान पर होता है, जहाँ तीन नदियाँ – महानदी, पैरी और सोंढुर – मिलती हैं। इस त्रिवेणी संगम को छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ भी कहा जाता है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। https://twitter.com/ChhattisgarhCMO/status/1886346767127478394 पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व: राजिम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान राम ने अपने वनवास काल के दौरान इस संगम में स्नान…

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खुटाघाट बांध, जिसे संजय गांधी जलाशय के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह बांध न केवल सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। खारून नदी पर बना यह बांध, प्रकृति और इंजीनियरिंग का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इतिहास और निर्माण: खुटाघाट बांध का निर्माण 1930 में पूरा हुआ था। इस बांध के निर्माण के दौरान लगभग 208 गांवों को मिला दिया गया था, जो इसकी विशालता और क्षेत्र के लिए इसके महत्व को दर्शाता है। बांध के निर्माण से…

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक शहर रतनपुर में स्थित श्री महामाया देवी मंदिर, एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह 52 शक्तिपीठों में से एक होने के कारण विशेष महत्व रखता है। माँ दुर्गा और महालक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर, शक्ति और आस्था का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इतिहास और मान्यताएं: महामाया मंदिर का इतिहास 12वीं-13वीं शताब्दी का है, जब इसे कलचुरी राजवंश के राजा रत्नदेव ने बनवाया था। कहा जाता है कि राजा रत्नदेव को यहाँ देवी काली के दर्शन हुए थे, जिसके बाद…

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दाऊ दुलार सिंह मंदराजी, जिन्हें प्यार से ‘दाऊ मंदराजी’ के नाम से जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के एक ऐसे लोक कलाकार थे जिन्होंने अपनी कला और समर्पण से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊँचाई दी। उन्हें छत्तीसगढ़ में ‘नाचा’ नामक लोक कला के पुनर्जीवन और लोकप्रियता का श्रेय दिया जाता है। वे न केवल एक कलाकार थे, बल्कि एक गुरु, एक निर्देशक, और सबसे बढ़कर, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के सच्चे उपासक थे। प्रारंभिक जीवन और कला की ओर रुझान: दाऊ मंदराजी का जन्म 1 अप्रैल, 1911 को राजनांदगांव जिले के रवेली गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ…

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आचार्य विद्यासागर जी महाराज एक प्रमुख दिगंबर जैन आचार्य थे, जिन्होंने अपना जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रचार और प्रसार में समर्पित कर दिया। वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे – विद्वान, विचारक, लेखक, कवि, और समाज सुधारक। उनके विचारों और शिक्षाओं ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: 10 अक्टूबर, 1946 को कर्नाटक के बेलगाम जिले के सदलगा में जन्मे, उनका नाम विद्याधर रखा गया था। उनके पिता, मल्लप्पा, बाद में मुनि मल्लिसागर बने, और उनकी माता, श्रीमती, आर्यिका समयमति कहलाईं। उन्होंने नौवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन उनका मन…

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