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Author: हमर गोठ
डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले का नाम छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में सेवा, समर्पण और निस्वार्थ चिकित्सा का पर्याय बन चुका है। बस्तर के हीरानार स्थित ‘विवेकानंद आरोग्य धाम’ के माध्यम से इस दंपति ने पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से वनवासियों के जीवन में स्वास्थ्य का उजियारा फैलाया है। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारत सरकार द्वारा इन दोनों को संयुक्त रूप से पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित करने की घोषणा, इनके वर्षों के कठिन परिश्रम का फल है। मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले…
बस्तर के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को स्थानीय लोग सम्मान और स्नेह से ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारते हैं। पिछले चार दशकों (लगभग 40 वर्षों) से वे अबूझमाड़ और वनांचल के उन दुर्गम इलाकों में काम कर रही हैं, जहाँ कभी बुनियादी सुविधाओं का पहुंचना भी एक सपना था। 1. बचपन और सेवा का संकल्प बुधरी ताती की सेवा यात्रा मात्र 15 वर्ष की आयु में शुरू हुई थी। उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा हीरानार के ही गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से मिली। समाज सेवा के प्रति उनकी ललक इतनी तीव्र थी…
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और पाषाण कालीन गुफाओं के लिए जाना जाता है। हाल ही में खोजी गई ग्रीन गुफा (Green Cave) ने न केवल पर्यटकों बल्कि भू-वैज्ञानिकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। 1. गुफा की उत्पत्ति और “हरा” रहस्य आम तौर पर गुफाएं अंधेरी और भूरे रंग की होती हैं, लेकिन इस गुफा की खासियत इसका पन्ना जैसा हरा रंग है। 2. भूगर्भीय संरचना (Geological Formation) यह गुफा लाखों वर्षों की कार्स्ट (Karst) प्रक्रिया का परिणाम है। चूना पत्थर (Limestone) के क्षेत्रों में पानी के कटाव से बनी…
बिलासपुर (छत्तीसगढ़): प्रकृति प्रेमियों और छत्तीसगढ़ के वासियों के लिए 12 दिसंबर 2025 का दिन गौरव का नया सूरज लेकर आया। बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय (Kopra Reservoir) अब केवल एक सिंचाई बांध नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी ‘रामसर साइट’ बन गया है। ईरान के रामसर कन्वेंशन से मिली इस वैश्विक मान्यता ने छत्तीसगढ़ को दुनिया के उन चुनिंदा नक्शों पर ला खड़ा किया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित हैं। सात समंदर पार से आते मेहमानों का ‘घर’ बिलासपुर शहर से महज 15 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के साकरी गांव के पास स्थित यह जलाशय अपनी…
छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की प्रतिभाशाली बालिका योगिता मंडावी ने जूडो खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोण्डागांव में पली-बढ़ी योगिता को उनकी उल्लेखनीय खेल उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा योगिता मंडावी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में देशभर से चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों जैसे खेल, नवाचार, सामाजिक सेवा, कला एवं संस्कृति आदि में…
छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित कोरिया रियासत, जो कभी गोंडवाना साम्राज्य का हिस्सा रही और बाद में चौहान वंश के शासकों के अधीन आई, अपनी एक विशिष्ट पहचान रखती है। इस रियासत की प्रशासनिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र ‘रामानुज विलास’ (कोरिया पैलेस) है। बैकुंठपुर के महलपारा (पूर्व नाम राजापारा) में स्थित यह महल भारत के उन गिने-चुने राजमहलों में से एक है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन 20वीं सदी के पूर्वार्ध में ही देख लिया गया था। 1. निर्माण की पृष्ठभूमि: एक महत्वाकांक्षी विजन (1923-1946) इस महल का निर्माण महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव के कार्यकाल के…
हाल ही में हुए महिला कबड्डी विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की शानदार जीत के साथ, छत्तीसगढ़ की संजू देवी का नाम देश भर में छा गया है। कोरबा जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर संजू देवी ने न केवल भारत को लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ (Most Valuable Player) का प्रतिष्ठित खिताब भी अपने नाम किया। 🏆 विश्व कप में यादगार प्रदर्शन संजू देवी एक रेडर (Raider) के तौर पर टीम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरीं। उनकी तेज़ गति,…
हाल ही में महिला क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद, टीम के पर्दे के पीछे की एक महत्वपूर्ण सदस्य आकांक्षा सत्यवंशी सुर्खियों में हैं। छत्तीसगढ़ की इस बेटी ने टीम की फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में खिलाड़ियों की फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और ऊर्जा संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। 💪 जीत में महत्वपूर्ण योगदान आकांक्षा सत्यवंशी का योगदान किसी खिलाड़ी से कम नहीं है। एक फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में, उनका काम खिलाड़ियों को चोटों से बचाना, उनकी रिकवरी सुनिश्चित…
छत्तीसगढ़ की गोदना परंपरा (Godna Tradition) केवल शारीरिक सजावट का माध्यम नहीं है, बल्कि यह यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और गहरी आस्था का प्रतीक है। इसे छत्तीसगढ़ के लोकजीवन में एक अमर शृंगार माना जाता है, जो मृत्यु के बाद भी व्यक्ति के साथ जाता है। गोदना: इतिहास और महत्व गोदना शब्द का शाब्दिक अर्थ है “चुभाना” या “छेदना”। इस कला में, त्वचा पर सुई चुभोकर उसमें प्राकृतिक रंगों (जैसे- काजल, तेल या वनस्पति के रस) से बने लेप को भरा जाता है। यह एक प्रकार का स्थायी टैटू है, जिसे सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की महिलाएं…
बस्तर का अंचल अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और त्यौहारों के लिए जाना जाता है। यहाँ के त्यौहार प्रकृति और कृषि से गहरे जुड़े हुए हैं, जो यहाँ के लोगों के जीवन का अभिन्न अंग हैं। हरियाली अमावस्या (श्रावण अमावस्या) के साथ ही बस्तर में कृषि-चक्र का आरंभ होता है और इसी के साथ शुरू होता है त्यौहारों का सिलसिला, जिन्हें यहाँ जगार उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जगार: एक महायज्ञ जगार का शाब्दिक अर्थ है “जग” यानी “यज्ञ”। यह एक ऐसा महायज्ञ है जिसके माध्यम से यहाँ के लोग अपने देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। जगार एक अनुष्ठान…
