Author: हमर गोठ

बस्तर के आदिवासियों की धार्मिक मान्यताएं उनके अपने पुरातन विश्वासों एवं हिन्दुओं के निकट सम्पर्क से पड़े प्रभाव का मिलाजुला बहुत ही जटिल रूप है। बस्तर का क्षेत्र इतना बड़ा है और लोग इतनी विविधता लिये हैं कि किसी एक धारणा को सम्पूर्ण बस्तर पर लागू करना अतिसाधारिणीकरण होगा। यहाँ के निवासियों में आज भी विशुद्ध आदिवासी विश्वासों से लेकर हिन्दू मान्यताओं के मिश्रण के अनेक चरण एक साथ देखे जा सकते हैं। इसका सबसे रोचक तथ्य यह है कि यहाँ विश्वास और मान्यताएं केवल आदिवासियों द्वारा हिन्दुओं से नहीं ली गयी हैं बल्कि यहाँ बसने वाली हिन्दू जातियां भी…

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पंथी नृत्य सतनाम-पंथ का एक आध्यात्मिक और धार्मिक नृत्य होने के साथ-साथ एक अनुष्ठान भी है। सामूहिक अराधना है। यह वाह्य-स्वरूप में मनोरंजन एवं अन्तःस्वरूप में आध्यात्मिक साधना है। पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनामी समुदाय का प्रमुख नृत्य है। पंथी गीतों में गुरु घासीदास के चरित्र गायन किया जाता है। इसमे आद्यात्मिक सन्देश के साथ मानव जीवन की महत्ता होती है। इसमे रैदास, कबीर तथा दादू आदि संतों के आध्यात्मिक संदेश भी इसमें पाया जाता है। यह नृत्य दिसम्बर माह के 18 तारीख से शुरू होता है जो कि परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा का जन्म दिवस है।इसी दिन जैतखाम…

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उन दिनों सोनाखान एक रियासत के रूप में जानी जाती थी। जो आजकल छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में आता है। जहां के बिंझवार जमीदार परिवार में वीर नारायण सिंह का जन्म 1795 में हुआ था। बचपन से ही वीर नारायण सिंह को वीरता देशभक्ति और निडरता अपने पिता से विरासत में मिली थी। बचपन से ही वह धनुष बाण, मल्लयुद्ध, तलवारबाजी, घुड़सवारी और बंदूक चलाने में महारत हासिल कर चुके थे। अंग्रेज उनके शौर्य से डरे हुए थे। नारायण सिंह से वीर नारायण सिंह बनने की कहानीदरअसल वर्तमान छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के सोनाखान इलाके के एक बड़े…

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की पहचान यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक पठारों और नदियों की सुंदरता तथा एतिहासिक रियासत से है। इसके साथ ही पिछले साढ़े तीन वर्षों से जशपुर की पहचान में एक नया नाम जुड़ गया है और ये पहचान अब देशव्यापी हो गयी है। अभी तक चाय की खेती के लिए लोग असम या दार्जिलिंग का ही नाम लेते रहे हैं लेकिन जशपुर में भी चाय की खेती होने लगी है। जो पर्यटकों को भी अपनी तरफ आकर्षित कर रही है। हम सभी यह जानते हैं कि पर्वतीय और ठंडे इलाकों में ही चाय की खेती…

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चित्रकोट जलप्रपात भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर ज़िले में इन्द्रावती नदी पर स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। इस जलप्रपात की विशेषता यह है कि वर्षा के दिनों में यह रक्त लालिमा लिए हुए होता है, तो गर्मियों की चाँदनी रात में यह बिल्कुल सफ़ेद दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ में कई सारे खूबसूरत जलप्रपात हैं उनमें से एक है चित्रकोट जलप्रपात इसे भारत का नियाग्रा फॉल्‍स के रूप में जाना जाता है। यह भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात है। यह इन्द्रावती नदी में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर शहर से 38 किलोमीटर की दुरी पर चित्रकोट जलप्रपात स्थित है जिसकी…

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भारत के इतिहास में कलचुरी राजवंश स्थान महत्वपूर्ण है 550 से लेकर 1750 तक लगभग 12 सौ वर्षो की अवधि में कलचुरी नरेश उत्तर अथवा दक्षिण भारत में किसी ना किसी प्रदेश पर राज्य करते रहे शायद ही किसी राजवंश ने इतने लंबे समय तक राज्य किया होगा। कलचुरी वंश का मूल पुरुष कृष्णराज था जिसने इस वंश की स्थापना की और 500 से लेकर 575 ईसवी तक राज्य किया कृष्ण राज्य के बाद उसका पुत्र शंकरगंन प्रथम ने 575 से 600 ईसवी तक और शंकरगन के बाद उसका पुत्र बुधराज ने 600 से 620 ईसवी तक शासन किया किंतु…

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छत्तीसगढ़ के इतिहास में मौर्यकाल का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी वंश के सम्राट चन्द्रगुप्त को भारत का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट होने का गौरव प्राप्त है। चन्द्रगुप्त के पश्चात उसका पुत्र बिंदुसार सिंहासन पर बैठा, उसने अपने राज्य की सीमा दक्षिण की ओर बढ़ाई। जब उसका पुत्र अशोक ई. पू. 272 में गद्दी पर बैठा तब राज्य की सीमा मद्रास तक पहुंच गई थी। उड़ीसा के प्रान्त कलिंग को भी अशोक ने जीत लिया। कलिंग देश महानदी और गोदावरी के बीच बंगाल की खाड़ी के किनारे का प्रदेश था, जिसमें कुछ भाग छत्तीसगढ़ का आ जाता था। इससे यह सिद्ध…

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बस्तर में जब सब्जियों की बात होती है तो पहले जंगलों की सब्जियों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। यहाँ जंगलों में बहुत से ऐसे पौधे हैं जिन्हे सब्जियों के रूप में अपने आहार में लिया जाता है। इन पौधों में से एक है बास्ता। यह बांस का अंकुरित पौधा होता है जिसे यहाँ के लोग बड़े ही चाव से सब्जी बनाकर खाते हैं। इसे करील नाम से भी बोला जाता है।बांस के ये नए पौधे (बास्ता) जो की सफेद रंग के होते हैं ये हर साल जून से अगस्त के महीनों के बीच में आते हैं ।बांस करील बांस की…

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छत्तीसगढ़ का सबसे लजीज, खास और स्वादिष्ट पकवानों में सबसे प्रिय चीला है। टमाटर की चटनी के साथ जब यह जीभ पर आता है तो मन को रंगीला बना देता है। सर्दी का मौसम आते ही घर के साथ होटल, रेस्टोरेंट में प्लेट सज जाते हैं। गुनगुनी धूप में इसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है। नए चावल के चीला का स्वाद और भी मजेदार रहता है। चीला चावल आटे के साथ अब 36 प्रकार के बनने लगे हैं। चीला के साथ टमाटर की स्पेशल चटनी भी परोसी जाती है। राज्य के अन्य व्यंजनों की तुलना में चीला सबसे प्रमुख…

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पौष्टिकता से भरपूर, कई रोगों में कारगर बोरे-बासी की चर्चा इन दिनों देशभर में हो रही है। वैसे बोरे-बासी एक छत्तीसगढ़ी व्यंजन है, लेकिन भारत के अन्य हिस्सों में भी इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं बोरे-बासी क्या है, इसे और क्या कहते, कैसे बनाया जाता, इसके क्या फयदे हैं। बोरे-बासी क्या है? वैसे तो बोरे-बासी Bore Basi दो शब्द हैं, लेकिन इसे एक ही व्यंजन के लिए उपयोग किया जाता है। गर्मियों के मौसम में छत्तीसगढ़ के मजदूर, किसान और आम नगरिक भी इसका उपयोग करते हैं। मना जाता है कि बोरे-बासी खाने से…

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