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जलप्रपातों का राजा चित्रकोट जलप्रपात

जलप्रपातों का राजा चित्रकोट जलप्रपात

चित्रकोट जलप्रपात भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर ज़िले में इन्द्रावती नदी पर स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। इस जलप्रपात की विशेषता यह है कि वर्षा के दिनों में यह रक्त लालिमा लिए हुए होता है, तो गर्मियों की चाँदनी रात में यह बिल्कुल सफ़ेद दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ में कई सारे खूबसूरत जलप्रपात हैं उनमें से एक है चित्रकोट जलप्रपात इसे भारत का नियाग्रा फॉल्‍स के रूप में जाना जाता है। यह भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात है। यह इन्द्रावती नदी  में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर शहर से 38 किलोमीटर की दुरी पर चित्रकोट जलप्रपात स्थित है जिसकी चौड़ाई 985 फीट और 95 फीट है, ऊँचाई से गिरते हुए खूबसूरत दृश्य का निर्माण करती है जिसे देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से इसकी ओर खींचे चले आते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात न सिर्फ छत्तीसगढ़ राज्य बल्कि भारत के सबसे प्रसिद्ध जलप्रपातों में से एक है। चित्रकोट जलप्रपात, इंद्रावती नदी का सबसे खूबसूरत भाग है। यह जलप्रपात अपने विशालता, आकर्षक व मनोहारी स्वरूप, सुलभ पहुॅच व बारहमासी स्वरूप के कारण सदैव पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है।  

जलप्रपात का नामकरण
चित्रकोट शब्द ‘चीतल’ नामक वन्यप्राणी के स्थानीय उच्चारित स्वरूप ’चीतर‘ अर्थात् स्पाॅटेड हिरण तथा ‘कोट‘ अर्थात् रहवास संबंधी शब्द से बना है। जलप्रपात को स्थानीय बोली में ’घूमर’ षब्द से संबोधित करते हैं तथा जलप्रपात के किनारे स्थित बसाहट को ’घूमरमुंड पारा’ अर्थात् ’जलप्रपात के षीर्ष पर स्थित बसाहट’ के नाम से जाना जाता है। इस स्थान के चित्रकोट या चीतरकोट नामकरण संबंधी जनश्रुति के अनुसार- प्राचीन काल में यह सघन वन क्षेत्र था तथा इस क्षेत्र में चीतल अधिक संख्या में पाये जाते थे। एक बार कोई राजा इस क्षेत्र में षिकार करने आया, काफी प्रयास के बाद भी उसे कोई जानवर न मिलने पर राजा क्रोधित हो गया। उसने इस क्षेत्र के ग्राम प्रमुख को बुलाया व क्रोधित होकर उससे कहा कि ’मैने सुना था कि इस क्षेत्र में बहुत जंगली जानवर हैं, लेकिन मुझे नही मिले। तुम बताओ कि जानवर कहाॅं हैं।’ राजा की क्रोधपूर्ण बातों से ग्राम प्रमुख डर गया तथा उसने अपने जादू के प्रभाव से गांव के बाहरगुड़ा पारा में स्थित ’मुसाडीह’ (चूहे का बिल) की ओर इषारा कर राजा से कहा कि जानवर इसमें हैं। उसके जादू के प्रभाव से एक साथ अनेक चीतल निकल कर भागने लगे, जिससे राजा हतप्रभ होकर देखने लगा तथा अंत में एक ही चीतल का षिकार करने में सफल हुआ। इस प्रकार इस जगह में चीतल का रहवास ’कोट’ होने के कारण इस स्थान का नाम चीतर कोट पड़ा जो धीरे-धीरे ’चित्रकोट’ में परिवर्तित हुआ तथा स्थान नाम के आधार पर इंद्रावती नदी के जलप्रपात का नाम चित्रकोट जलप्रपात पड़ा। 

चित्रकोट जलप्रपात घुमने जाने का सबसे अच्छा समय

चित्रकोट फॉल्‍स जाने को तो आप किसी भी मौसम में जा सकते हैं लेकिन मानसून के समय सबसे ज्यादा पर्यटक जलप्रपात के रौद्र रूप को देखने जाते हैं। अगर आपको मानसून में यात्रा करना थोडा कठिन लगता है तो आप नवंबर से फरवरी महीने में जा सकते है इस समय झरने का पानी दूध की तरह सफ़ेद, मौसम सुहावना होता है। इस मौसम में भी आप चित्रकोट जलप्रपात के खूबसूरत दृश्य का लुफ्त उठा सकते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात के दोनों ओर बसाहट

इसके एक ओर चित्रकोट ग्राम बसा हुआ है तो दूसरी ओर तीरथा ग्राम बसा हुआ है। चित्रकोट ग्राम पंचायत है, यह सात मुहल्लों में विभाजित है- घुमरमुंड पारा, पदरगुड़ा, लामड़ागुड़ा, बाहरगुड़ा, खरियागुड़ा, खालेपारा तथा इंगराभाटी पारा है। जलप्रपात घुमरमुंड पारा में स्थित है, हल्बी बोली का ‘घुमर‘ षब्द हिंदी भाषा के झरना या जलप्रपात का समानार्थी षब्द है। इस प्रकार घुमरमुंड पारा का अर्थ जलप्रपात के उपरी भाग में बसा पारा है। 
जलप्रपात के दूसरी ओर तीरथा ग्राम बसा हुआ है। ‘तीरथा‘ शब्द की उत्पत्ति संभवतः तीर्थ षब्द से हुई होगी। कुछ जानकार ‘तीरथा‘ शब्द की उत्पत्ति इस क्षेत्र में तीर्थंकर की उपासना से जुड़ा मानते हैं। तीरथा के समीप स्थित कुरूसपाल नामक स्थान से जैन संप्रदाय के 24 वें तीर्थंकर महावीर की प्राचीन मूर्ति प्राप्त हुई है, जो इस क्षेत्र में तीर्थंकर की उपासना की पुष्टि करते हैं। चित्रकोट तथा तीरथा ग्राम में कुड़ुख, धाकड़, माहरा, यादव/राउत, पनका, मुरिया, भतरा, हल्बा तथा माड़िया जाति के परिवार निवास करते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात कैसे पहुँच सकते हैं

  • सडक मार्ग – जगदलपुर कई बड़े शहरो से जुड़ा हुआ है आप चित्रकोट जलप्रपात बस या अन्य वाहनों की मदद से आसानी से पहुंच सकते हैं।
  • निकटतम हवाई अड्डा – स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा रायपुर।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन – जगदलपुर रेलवे स्टेशन

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