Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Hamar GothHamar Goth
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe
    • होम
    • कहानियाँ
    • पर्यटन
    • संस्कृति
    • इतिहास
    • खान-पान
    • बस्तर
    Hamar GothHamar Goth
    Home»बस्तर»बस्तर के पावन भूमि के देवी-देवता
    बस्तर

    बस्तर के पावन भूमि के देवी-देवता

    हमर गोठBy हमर गोठJuly 1, 202316 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
    bastar devi
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    बस्तर के आदिवासियों की धार्मिक मान्यताएं उनके अपने पुरातन विश्वासों एवं हिन्दुओं के निकट सम्पर्क से पड़े प्रभाव का मिलाजुला बहुत ही जटिल रूप है। बस्तर का क्षेत्र इतना बड़ा है और लोग इतनी विविधता लिये हैं कि किसी एक धारणा को सम्पूर्ण बस्तर पर लागू करना अतिसाधारिणीकरण होगा। 

    यहाँ के निवासियों में आज भी विशुद्ध आदिवासी विश्वासों से लेकर हिन्दू मान्यताओं के मिश्रण के अनेक चरण एक साथ देखे जा सकते हैं। इसका सबसे रोचक तथ्य यह है कि यहाँ विश्वास और मान्यताएं केवल आदिवासियों द्वारा हिन्दुओं से नहीं ली गयी हैं बल्कि यहाँ बसने वाली हिन्दू जातियां भी ऐसे ही विश्वासों में जीती है सामान्यत: कोई विश्वास या मान्यता यहाँ जातिगत न होकर स्थानीय होती है जिसे इस क्षेत्र के सभी लोग मानते हैं ।

    बस्तर के मूल आदिवासी विश्वासों एवं पूजा–पद्यति में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं दीखता। देवी देवताओं की मूर्तियों का प्रचलन बाद में हुआ है। आदिवासियों के घर , गांव में बने देव स्थानों में मूर्तियां आवश्यक अंग नहीं हैं।  अधिकांश आदिवासी देव स्थानों में देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व कोई अनघढ़ पत्थर , लकड़ी , लोहा, धातु का टुकड़ा अथवा शंख, कौढ़ी या घंटी जैसी कोई वास्तु करती है। जात्रा और मढ़ई आदि में भी देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व उनकी मूर्तियां नहीं बल्कि डोली, विमान, आंगा , डांग, छत्र एवं कुर्सी आदि करते हैं। यह सभी उपादान एक प्रकार के चलायमान देव स्थान की भूमिका निभाते हैं।  मूर्ति के स्थान पर यहां स्वयं देवी-देवता ही, सिरहा के माध्यम से लोगों से सीधा संपर्क रखते आए हैं।  अत : आज बढ़ते हिन्दू प्रभाव के कारण  मूर्तियों के प्रचलन के उपरांत भी, इन मूर्तियों को कोई केंद्रीय भूमिका प्राप्त नहीं है।  वे देवता के प्रतिनिधि नहीं बल्कि फूल, धूप और नारियल की तरह उन्हे चढ़ाई जाने वाली वस्तु जैसी हैसियत रखती हैं।  वे मनौतियां पूरी होने पर भक्तों द्वारा देवी-देवताओं पर चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा होती हैं। 

    बस्तर में देवी– देवताओं की संख्या अनगिनित है, कुछ देवी देवता ऐसे भी हैं  जिनका नाम सभी स्थानों पर सुनने को मिलता है परन्तु  अधिकांशत :  प्रत्येक  गांव  में  नए नए  देवी देवताओं के नाम सुनने को मिलते हैं।  यदि इन्हे वर्गीकृत किया जाए  तो  निम्न प्रकार रखा जा सकता है:

    • देवी-देवता जिन्हे सम्पूर्ण बस्तर में माना जाता है, जिनकी सत्ता सारे बस्तर पर है ,जैसे दंतेश्वरी माई।
    • देवी-देवता जिनकी मान्यता परगने स्तर पर है, जैसे कोटगुड़िन माता कोंडागांव  परगने की देवी है।
    • ग्राम स्तर के देवी देवता, आमतौर पर पाट देव के आँगा ग्राम स्तर के होते हैं जिनकी मान्यता ग्राम विशेष में होती है।
    • पारिवारिक देवी -देवता , यह आवश्यक नहीं की प्रत्येक परिवार का अपना व्यक्तिगत  देवी- देवता हो पर अनेक परिवारों (एक गोत्रा के  सभी कुटुम्बियों ) का अपना  देवता होता है जिसकी वे पूजा करते है जैसे गोबरइन माता।

    देवी-देवताओं का वर्गीकरण उनके पूजे जाने के स्थान  के अनुसार से भी  किया जा सकता है।  जैसे:

    • गांव  के अन्दर देवस्थान  में पूजे जाने वाले देवी देवता, जैसे– भूमिहार
    • घर के देवस्थान में पूजे जाने वाले देवी देवता,  जैसे-  गोंडिन देवी
    • जंगल  में वृक्षों  के झुरमुट  में बनाये गए देवस्थान में पूजे जाने वाले देवी देवता, जैसे –गादीमाई
    • गांव  के बाहर  बनाये गए देवस्तथान मे पूजे जाने वाले देवी देवता, जैसे भीमा डोकरा या भीमा देव

    यद्यपि हल्बी बोली में देव के लिए ‘पेन’ शब्द है परन्तु आजकल बस्तर में आमतौर पर स्त्री और पुरुष दोनो ही देवों के लिए ‘देवी’ शब्द का प्रयोग किया जाता है और लोग इस बात पर बहुत ध्यान भी नहीं देते हैं। यहां देवस्थानों के नाम भी अलग अलग होते है जैसे:

    मंदिर: दंतेश्वरी माता का देवस्थान मंदिर कहलाता है।

    माता गुढ़ी : माताओं का देवस्थान मातागुढ़ी कहलाता है इसे देवी गुढ़ी या गुढ़ी भी कहते हैं।

    राउड़ : पाटदेव का देवस्थान को राउड़ कहा जाता है, जहां आंगा रखा जाता है।

    झाला: वृक्ष की टहनियों से बनाया गया देवी का अस्थायी स्थान झाला कहलाता है।

    बस्तर के कुछ देवी-देवताओं की सूची :

    क्र. देवी/देवता                              ग्राम
    1 माँ दंतेश्वरी देवी                         दंतेवाड़ा
    2 श्री धावडा वीर                          चैतगिरी
    3 श्री हिगांलाजीन माता                    बेडागांव
    4 श्री धावडा वीर                          बदलावण्ड
    5 श्री भैरम बाबा                          सौतपुर
    6 श्री हिगांलाजीन माता                   बनियागांव
    7 श्री मावली माता                        आवराभाटा
    8 श्री हिगांलाजीन माता                   बकवागुडा
    9 श्री धावडा वीर                          मगरगुडा
    10 श्री गंगादई                            सोनपुर
    11 श्री कुसमादई                         कोटियावण्ड
    12 श्री लेलगीन माता                     मोतीगावं
    13 मोरियामाता                          बांगडिया
    14 श्री पदामई माता                     बांगडिया
    15 श्री बावडी माता                      खुटीमुडा
    16 श्री जुगनीमाता                       बकवागुडा
    17 श्री हिगांलाजीन माता                टुटीगांव
    18 श्री जलदरी माता                     कोटियावण्ड
    19 श्री गंगनादई                          बांगमुण्डी पनेडा
    20 श्री चिकलामाता                       कोडली
    21 श्री शीतला माता                      गीदम
    22 श्री मायादई माता                    भालूनाला
    23 श्री लछनदई                          पनेडा
    24 श्री जलगुडी                           पनेडा
    25 श्री दुलपती दुलारी                    पनेडा
    26 श्री डोला डोकरा                      पनेडा
    27 श्री फुलसुंदरी माता                   हीरानार
    28 श्री रूपादई माता                     हीरानार
    29 श्री जलगुडी माता                     परपा
    30 श्री बामनदई                          बागमुडी
    31 श्री फतकादई माता                  डुमाय
    32 श्री झरनानन पुरी                     मडसे
    33 श्री सोनादई                          घोटपाल
    34 श्री भैरम बाबा                       हठरनार
    35 श्री गोपाल बंदी                      नागुल
    36 श्री गंगनादई                         हाउरनार
    37 श्री तुलाबाटी                         नागुल
    38 श्री डोला डोकरी माता              पनेडा
    39 श्री दुलारदई बगमुंडी                पनेडा
    40 श्री सांडी माता                       मडसे
    41 श्री परदेशीन माता                   बागमुंडी
    42 श्री परदेशी माता                    आरला
    43 श्री डोंगरदई बगमुंडी                पनेडा
    44 श्री फुलसुंदरी माता                 घोटपाल
    45 श्री बोरिया माता                     कटुलनार
    46 श्री जलंधरी माता                    कटुलनार
    47 श्री कंकाली माता बांगमुण्डी        पनेडा
    48 श्री परदेशी माता                     माडपाल
    49 श्री दुलपती दूरीन बांगमुण्डी         पनेडा
    50 श्री जलनंदरी                         माडपाल
    51 श्री हिंगालाजीन माता                कटुलनार
    52 श्री नंदपुरीन माता                    हारम
    53 श्री कलीपलीन माता                  हारम
    54 श्री फुलसुंदरी माता                  जोडातराई
    55 श्री गंगनादई माता                    पनेडा
    56 श्री गंगनादई माता                    पनेडा
    57 श्री हिंगालाजीन माता                पुरनतरई
    58 श्री थिकलादई                       हाउरनार
    59 श्री झारापुरी माता                    हाउरनार
    60 श्री शितलादई माता                  सोनारपारा गीदम
    61 श्री बावडी मता                       घोटपाल
    62 श्री जंलधरी माता                     घोटपाल
    63 श्री केशरपालिन माता                जोडातराई
    64 श्री गंगनादई माता बांगमुण्डी         पनेडा
    65 श्री हिंगालाजीन माता                 हाउरनार
    66 श्री फुलसुंदरी माता                  आरला
    67 श्री फुलसुंदरी माता                  घोटपाल
    68 श्री घोटपालिन माता                 आरला
    69 श्री उसेडी देव                        घोटपाल
    70 श्री सोनादई                          घोटपाल
    71 श्री फाटेकादई माता                 मडसे
    72 श्री शितलादई माता                 बारसूर
    73 श्री लच्छनदई माता                 पनेडा
    74 श्री हिंगलादई माता                 हाउरनार
    75 श्री गंगनादई माता                  हाउरनार
    76 श्री गंगनादई माता                  घोटपाल
    77 श्री परदेशिन माता                  गुमडा
    78 श्री हिंगालाजीन माता               गुमडा
    79 श्री झटानारिनपुरी                   गीदम
    80 श्री बावडी माता                   कतियाररास
    81 श्री कंकाली माता                  डेंगलरास
    82 श्री चिकलदई                      बागमुंडी
    83 श्री भैरम बाबा                     गीदम
    84 श्री केशरपालिन माता             गीदम
    85 श्री गंगनादई माता                जावंगा
    86 श्री भैरम बाबा                     गीदम
    87 श्री पदमादेव                       हारम
    88 श्री हिंगलाजीन परदेशिन          जावंगा
    89 श्री शितला माता                  गीदम
    90 श्री झारीन माता                   पनेडा
    91 श्री शितलादई माता               मडसे
    92 श्री गुबालबांदी माता              मेटाकोंटा
    93 श्री बांमनदई मात                 जावंगा
    94 श्री कोलाकामनीन माता          जांवगा
    95 श्री कंकाली माता                 जांवगा
    96 श्री हिंगालाजीन माता             जांवगा
    97 श्री गंगा डोकरी                   जांवगा
    98 श्री गंगनादई माता                बागमुडी
    99 श्री जलसूंदरी माता               परपा
    100 श्री कायाराज                   परपा
    101 श्री गावदई माता               पोंदूम
    102 श्री काटाकोली माता           पोंदूम
    103 श्री झाराननरीन माता          पोंदूम
    104 श्री परदेशिन माता             गीदम नयापारा
    105 श्री बामनदई                   पोंदूम
    106 श्री सोनादई                    गीदम
    107 श्री गंगनादई माता             पोंदूम
    108 श्री परदेशिन माता             पोंदूम
    109 श्री हिंगालाजीन माता          जोडातराई

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email

    Related Posts

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026

    सांस्कृतिक परंपरा में बांसगीत: समाज और लोकजीवन का दर्पण

    April 8, 2026

    विवाह की रौनक थे भड़ौनी गीत, अब परंपरा हो रही ओझल

    April 1, 2026

    उरांव जनजाति का प्रमुख पर्व: सरहुल

    April 1, 2026
    Demo
    Top Posts

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Don't Miss

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    छत्तीसगढ़ के बड़े डोंगर क्षेत्र में स्थित नकटी देवरली एक ऐसी प्राचीन धरोहर है, जो…

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026

    सांस्कृतिक परंपरा में बांसगीत: समाज और लोकजीवन का दर्पण

    April 8, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    Latest Reviews
    Demo
    //

    We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

    Most Popular

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    देश की सबसे महँगी सब्ज़ी – बोड़ा, जानें क्या है इसमें खास?

    June 26, 2023

    छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार : हरेली

    June 27, 2023
    Our Picks

    बड़े डोंगर की प्राचीन धरोहर: रहस्यमयी नकटी देवरली

    April 8, 2026

    बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर: चइत परब के सुरीले लोकगीत

    April 8, 2026

    कांकेर: महानदी की गोद में बसा सोमवंशी शौर्य का प्रतीक

    April 8, 2026

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.