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बस्तर का गौर माड़िया नृत्य: आदिवासियों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत

बस्तर का गौर माड़िया नृत्य: आदिवासियों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत

छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति अपनी विविधता और समृद्धि के लिए जानी जाती है। यहां के आदिवासी समुदाय अपनी अनूठी परंपराओं, कला और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें से एक नृत्य है गौर माड़िया नृत्य, जो छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में रहने वाले माड़िया आदिवासियों द्वारा किया जाता है।

इतिहास:

गौर माड़िया नृत्य का इतिहास बहुत पुराना है। माना जाता है कि यह नृत्य हजारों सालों से माड़िया आदिवासियों द्वारा किया जा रहा है। यह नृत्य माड़िया आदिवासियों के जीवन और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

महत्व:

गौर माड़िया नृत्य माड़िया आदिवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है। यह नृत्य माड़िया आदिवासियों के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नृत्य माड़िया आदिवासियों के समुदाय की एकता और सद्भाव को भी दर्शाता है।

विशेषताएं:

गौर माड़िया नृत्य एक समूह नृत्य है, जिसमें पुरुष और महिला दोनों भाग लेते हैं। इस नृत्य में नर्तक अपनी परंपरागत वेशभूषा पहनते हैं। पुरुष नर्तक अपने सिर पर गौर के सींगों का मुकुट पहनते हैं और अपने शरीर पर काली मिट्टी लगाते हैं। महिला नर्तक अपने सिर पर लाल रंग का दुपट्टा पहनती हैं और अपने शरीर पर रंगीन बिंदी लगाती हैं।

गौर माड़िया नृत्य एक तीव्र गति वाला नृत्य है। इस नृत्य में नर्तक अपनी टांगों को तेजी से हिलाते हैं और अपने हाथों को ऊपर-नीचे करते हैं। नृत्य की ताल पर नर्तक तालियां भी बजाते हैं।

गौर माड़िया नृत्य की कई शैलियां हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध शैली “गौर नृत्य” है। गौर नृत्य में नर्तक एक दूसरे का हाथ पकड़कर एक सर्कल बनाते हैं और उस सर्कल में घूमते हुए नृत्य करते हैं।

प्रदर्शन:

गौर माड़िया नृत्य का प्रदर्शन आमतौर पर त्योहारों और समारोहों के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य का प्रदर्शन आमतौर पर खुले स्थान में किया जाता है। नृत्य की शुरुआत एक पुजारी के मंत्रोच्चारण से होती है। इसके बाद नर्तक नृत्य की शुरुआत करते हैं।

गौर मुकुट:

गौर माड़िया नृत्य का सबसे आकर्षक हिस्सा है गौर के सींगों का मुकुट। यह मुकुट तैयार करना एक श्रम और समय लेने वाला कार्य है। गौर के सींग दुर्लभ होते हैं, इसलिए कई बार जंगली भैंसों के सींग से काम चलाया जाता है।

गौर के चिकने काले सुनहरे सींगों को बांस की टोपी में दोनो और बांध दिया जाता है। ऊपर की ओर भृंगराज पंछी के पंखों की कलगी तैयार कर बांध दी जाती है। मुख के सामने बिलकुल दूल्हे के सेहरे की तरह कौड़ियों की लड़ियां लगा दी जाती है जिससे नर्तक का चेहरा ढक जाता है।

निष्कर्ष:

गौर माड़िया नृत्य छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति का एक अनमोल नृत्य है। यह नृत्य हमें माड़िया आदिवासियों के जीवन और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। हमें इस नृत्य को संरक्षित करने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।

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